खुदा ने जमी पर चाँद उतारे , उसमे से कही बेदाग बेबस बेचारे ,
अगर हम ना होते तो तुम्हे गजल कौन कहता ,इन खूबसूरत होटों को कमल कोन कहता ,
कुछ तो दम होगा उस मोहब्बत मैं वर्ना इस पत्थर के ढेर को ताज महल कौन कहता ,
मोहब्बत्त की रंजोरुमईस मैं चोट न आ जाये आपकी कलाई मैं ,
सच कहते है दुल्हन बन के आ जाओ जान दे देंगे मुँह दिखाई मैं .